Define e-Invoice in Hindi - By Shivansh Sir
e-Invoice (ई-इनवॉइस)
What is e-Invoice?
जीएसटी में e-Invoicing ऐसा सिस्टम है, जिसमें किसी Transaction की सामान्य रसीद को GSTN नेटवर्क द्वारा इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सत्यापित किया जाता है। जीएसटी नेटवर्क (GSTIN) के इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल (IRP) द्वारा, ऐसी हर रसीद के लिए एक विशिष्ट नंबर या पहचान संख्या (Identification Number) भी जारी होती है। इस प्रक्रिया को, E-invoicing या e-invoice under GST के नाम से भी जाना जाता है । e-Invoicing सिस्टम लागू होने से सभी Transactions की जानकारी ऑनलाइन और तुरंत सरकार के पास पहुंचती रहती है और टैक्स चोरी की chance नहीं रहता। Generally, फर्जी बिल बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने पर रोक लगाई जा सके ।
E-invoice के लिए टर्नओवर की लिमिट
- फिलहाल 10 करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले बिजनेस या कंपनियों के लिए B2B (Business-to-business) लेन-देन में ई-इनवॉइस (E-invoice) अनिवार्य है।
- इसके पहले 1 जनवरी 2021 से, 100 करोड़ रुपए से अधिक सालाना टर्नओवर वाले बिजनेस व कंपनियों के लिए E-invoice अनिवार्य किया गया था ।
- उसके भी पहले 1 अक्टूबर 2020 से 500 करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले बिजनेस व कंपनियों के लिए E-invoice अनिवार्य कर दिया गया था ।
- आगे चलकर 1 जनवरी 2023 से 5 करोड़ सालाना टर्नओवर वाले बिजनेस व कंपनियों पर भी E-invoice अनिवार्य हो जाएगा ।
- उसके बाद फिर 1 अप्रैल 2023 से इसे 1 करोड़ सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों व कंपनियों पर भी लागू किया जाना है। ताकि, ज्यादा से ज्यादा कारोबारियों को E-Invoicing के दायरे में लाया जा सके ।
E-invoice जारी न करने पर पेनाल्टी क्या लगती है?
- सरकार की ओर से निर्धारित टर्नओवर लिमिट वाली कंपनी या बिजनेस e-invoice सिस्टम को अपने यहां लागू नहीं करता है तो उस पर जुर्माना (penalty) लगेगा। या तो उससे पूरा का पूरा बकाया टैक्स वसूला जा सकता है या फिर 10 हजार रुपए प्रति रसीद (invoice) के हिसाब से जुर्माना वसूला जा सकता है ।
- इन दोनों में जो भी ज्यादा होगा, उसका भुगतान उसे करना होगा। इसके अलावा अगर वे ऐसी रसीदें (invoice) जारी करते हैं, जिन पर IRN नंबर और साइन किया हुआ QR code दर्ज नहीं है तो फिर इसे गलत (incorrect) और अपूर्ण (incomplete) रसीदें माना जाएगा। ऐसा करने वालों से 25 हजार प्रति रसीद के हिसाब से पेनाल्टी वसूला जाएगा ।
Steps to Generate an e-Invoice
Step -1 किसी ERP / अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर पर invoice तैयार कर लीजिए ।
ERP/अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर पर invoice तैयार करने में से जो सूचनाएं अनिवार्य रूप से दर्ज की जानी चाहिए वे इस प्रकार हैं-
- डॉक्यूमेंट टाइप कोड : (जैसे कि Invoice के लिए INV, Credit Note के लिए CRN, Debit Note के लिए DBN)
- सप्लायर का लीगल नेम (जैसा कि उसके पैन कार्ड में दर्ज हो)
- सप्लायर का GSTIN नंबर (e-invoice जारी करने वाले का)
- सप्लायर का पता (Address) : (बिल्डिंग नंबर / फ्लैट नंबर, रोड / गली संख्या)
- सप्लायर का स्थान: जैसे कि सिटी/ टाउन/ विलेज
- सप्लायर के राज्य का कोड (GSTN नेटवर्क के मुताबिक)
- सप्लायर का पिन कोड नंबर
- डॉक्यूमेंट नंबर (यूनिक इनवॉइस नंबर)
- पिछली ओरिजिनल इनवॉइस का नंबर (अगर डेबिट नोट एंड क्रेडिट नोट के कारण नई इनवॉइस जारी की जा रही है तो)
- डॉक्यूमेंट की तारीख (इनवॉइस जारी करने की डेट, YYYY-MM-DD फॉर्मेट में)
- सप्लाई प्राप्त करने वाले (खरीदार) का लीगल नेम पैन कार्ड में दर्ज नाम के मुताबिक)
- सप्लाई प्राप्त करने वाले (खरीदार) का GSTIN नंबर
- खरीदार का पता (बिल्डिंग नंबर/ फ्लैट नंबर, रोड/ गली संख्या वगैरह)
- खरीदार के राज्य की कोड संख्या
- खरीदार के राज्य का नाम (लिस्ट में से सेलेक्ट करें)
- खरीदार के स्थान का पिन कोड नंबर
- खरीदार की लोकेशन (सिटी/ टाउन/ या गांव)
- IRN (इनवॉइस रिफरेंस नंबर)
- शिपिंग के लिए GSTIN नंबर: (यहां पर उस व्यक्ति का जीएसटी नंबर डाला जाएगा जिससे माल की सप्लाई डिलीवर की जानी है। कोई अन्य व्यक्ति नहीं है तो खरीदार का ही जीएसटी नंबर डाला जाना चाहिए)
- शिपिंग से संबंधित स्थान का पिन कोड और स्टेट कोड
- जहां से माल डिस्पैच होना है, उसका नाम पता, स्थान, पिन कोड वगैरह
- सप्लाई में अगर, सेवाओं (service) की सप्लाई शामिल है तो उल्लेख करना है
- सप्लाई टाइप कोड: सप्लाई जिस प्रकार के है उसका कोड (जैसे कि बिजनेस टू बिजनेस, बिजनेस टू कंजूमर, सप्लाई टु सेज, सप्लाई टु एक्सपोर्ट, डीम्ड एक्सपोर्ट वगैरह)
- Item Description (सप्लाई आइटम का प्रकार)
- HSN Code: मुख्य सामानों और सेवाओं के एचएसएन कोड डाले जाने चाहिए
- Item_Price : सप्लाई होने वाले आइटम के रेट (बिना GST शामिल किए)
- Assessble Value: अगर किसी आइटम की कीमत में डिस्काउंट मिलना है तो डिस्काउंट के बाद का रेट (बिना GST शामिल किए)
- GST रेट: सप्लाई किए जाने वाले आइटम पर लागू जीएसटी दर
- Total IGST Value, Total CGST Value और Total SGST Value (सब अलग-अलग दर्ज करनी पड़ती हैं)
- Total invoice Value: जीएसटी को शामिल करते हुए कुल सप्लाई की कीमत (दशमलव के 2 अंकों तक)
फाइनल इनवॉइस की JSON file : E-Invoice जारी करने वाले विक्रेता को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका एकाउंटिंग या बिलिंग का सॉफ्टवेयर JSON file जनरेट करने लायक हो।
Step-2 उस रसीद के लिए एक IRN नंबर जारी होगा
All Information सबमिट करने पर e-invoice system की ओर से, उस रसीद का सत्यापन कर दिया जाता है और उसके लिए एक यूनिक IRN नंबर (Invoice Reference Number) जारी कर दिया जाता है। हो जाता है। यह नंबर e-invoice system की ओर से Hash Generation Algorithm का इस्तेमाल करके जारी किया जाता है, इसलिए इसे hash भी कहा जाता है । प्रत्येक डाक्यूमेंट के लिए 64 अंकों का IRN नंबर जारी होता है। यह सप्लायर के GSTIN + Fin. Year + Doc Type + Doc Number वगैरह को शामिल करके बनता है । IRN नंबर जारी करने के लिए दो तरीके इस्तेमाल होते हैं-
- ऑफलाइन टूल का इस्तेमाल करके
- API आधारित सिस्टम की मदद से
Step-3 Generation of the QR Code
क्यू आर कोड के साथ किसी सप्लाई के बारे में निम्नलिखित विवरण भी दर्ज होते हैं-
- माल भेजने वाले का GSTIN नंबर
- माल प्राप्त करने वाले का GSTIN नंबर
- सप्लायर की ओर से दिया गया़ invoice number
- इनवॉइस बनने की तारीख
- उस सप्लाई की कीमत और उस पर बनने वाला कुल टैक्स
- कुल लाइन आइटम्स की संख्या
- मुख्य आइटम्स के HSN code नंबर (ऐसे लाइन आइटम के, HSN code जिन पर सबसे ज्यादा टैक्स बनता हो)
IRN नंबर: इसे hash के नाम से भी जाना जाता है
नोट: डिजिटल रूप से साइन किए हुए QR code के साथ जो आईआरएन नंबर (unique IRN (hash) भी होता है। जिसे केंद्रीय जीएसटी पोर्टल द्वारा तो सत्यापित (verified) किया जा सकता है। साथ ही साथ, इसे ऑफलाइन एप्स की मदद से भी सत्यापित (verified) किया जा सकता है। Unique IRN की यह खासियत टैक्स अफसरों का काम आसान कर देती है। इसकी मदद से वे ऐसी जगहों पर भी किसी इनवॉइस का सत्यापन कर सकते हैं जहां पर इंटरनेट की सुविधा ना मौजूद हो। हाईवेज पर दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट की उपलब्धता नहीं भी हो सकती है ऐसे में Unique IRN उपयोगी साबित होता है।
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